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 नयन नयन अश्रु अश्रु  अश्रु अश्रु नयन नयन द्वंद करता अब ये तन हलके प्राण भारी मन भीगा मन भीगे नयन अश्रु अश्रु नयन नयन ~ तुम्हारा अनिमेष
 समय साथ संघर्ष विशेष स्मृति, स्पंदन, स्पर्श शेष ~ तुम्हारा अनिमेष
 क़यामत तो फिर भी एक दिन ठहर ही जायेगी तेरी 'मुस्कुराहट' का जाने क्या सिलसिला होगा ~ तुम्हारा अनिमेष ना मोहब्बत में किसी के, ना गिला किसी का ऐ मेरे दिल फिर तू इतना तेज़ धड़कता क्यूं है ~ तुम्हारा अनिमेष संग तेरे पल गुजरता है आहिस्ता आहिस्ता....... देख तुम्हें सूरज पिघलता है आहिस्ता आहिस्ता.. ~ तुम्हारा अनिमेष
 धीरे है ये दुनियां तेज़ धड़कते दिल से कोलाहल है यहां सबकुछ सिवा तेरे होने के सुकून से ठंडी है हर चीज़ जहां की गर्म आसुओं की बूंदों से सूखा है समंदर सारा हाथो पे तेरे चुम्बन से तबतक खूबसूरत है ये दुनियां साथ बना रहे जबतक तुझसे ~ तुम्हारा अनिमेष
 कैसे बतलाएं की इक नाम से ही क्या - क्या होता है कभी धड़कन बढ़ जाती है कभी आंखों में चमक होता है ~ तुम्हारा अनिमेष अब इतना भी ना बरस की सैलाब आ जाए तू नज़र में रहे, और तेरा ही ख़्वाब आ जाए ~ तुम्हारा अनिमेष 
 चांद गुजरा क़रीब से और हमें खबर नहीं सितारा टूटा क़रीब से और चांद को खबर नहीं भंवरा उड़ा करीब से और फूलों को खबर नहीं फूल गिरा मुरझाकर और शाखों को खबर नहीं उठ गया शहर सारा और सूरज को खबर नहीं सूरज डूबा शाम को और चिड़ियों को खबर नहीं ये कैसा दौर है बेफ़िक्री का अब हमें खबर नहीं
 मैं सूरज था, रौशनी का चांद के लिए ढल गया मैं पानी था नदी का पेड़ों के लिए रुक गया मैं पत्ता था पेड़ों का टहनियों के लिए सुख गया मैं टहनी था जंगल का सूरज के इंतज़ार में जल गया ~ तुम्हारा अनिमेष