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Showing posts from August, 2017
राष्ट्र निमार्ण के कर्णधार बनो, सूक्ति बनो विधि-विधान का हे अर्जुन तुम गांडीव धरो करो विनाश अक्षम्य अपमान का नवोदय की परिपाटी बनो सृजन करो नवोन्मेष उत्थान का हे मनुज तुम धैर्य धरो आशा बनो मेहनती किसान का तपस्वी का तप बनो तुम सिद्धांत बनो ब्रह्मांड के विज्ञान का हे युवा तुम पोषित हो संस्कृति से ध्वजवाहक बनो नारी के सम्मान का तुम ही दृश्य हो तुम ही हो द्रष्टा गांडीव कि टंकार तुम ही तुम ही कर्ण हो तुम ही हो द्रोण पांचजन्य का आव्हान तुम ही तुम ही प्रताप हो तुम ही शूर हो वीरता का प्रमाण तुम ही तुम ही क्रांति हो तम ही मशाल अस्मिता का गान तुम ही तुम ही मनु हो तुम ही हो शतरूपा ब्रह्म कि संतान तुम ही हे धुव्र तुम संकल्प करो रहूँगा अटल अविरल अविचल जबतक करूँ न लक्ष्य प्राप्त किर्ति सुनी थी जिसकी पुराणों मे उस भारतवर्ष कि यश हो व्याप्त ~ अनिमेष चौबे 'शरद'