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Showing posts from June, 2019
क़त्ल नहीं, है खुदकुशी तुम्हारी कह रही थी हमसे आंखें तुम्हारी दे रही थी पता खुशबू तुम्हारी उड़ रही थी जब जुल्फें तुम्हारी ~ तुम्हारा अनिमेष खुदकुशी साबित कर के हमारे क़त्ल को मुस्कुरा रही थी आंखे उनकी, होठ उनके, जुल्फें उनकी और खुद वों भी ~ तुम्हारा अनिमेष
वहम है या हकीक़त कि तेरी साया मेरे साथ चल रही है जिधर भी जा रहा हूं मैं तेरी खुशबू हवाओं में घुल रही है सदियों से दे रहा हूं जवाब, तुम्हारे एक ही सवाल का तुम कुछ पूछ रही हो या सिर्फ़ तुम्हारी आवाज़ गूंज रही है