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Showing posts from December, 2017
न कशिश की न अदाओं के अरमान रखें रखें कुछ तो हम सादगी भरी पहचान रखें काजल की न किसी श्रृंगार की परवाह रखें हम रखें तो तेरे नज़रो पर दिल कुर्बान रखें जिन्हें इश्क़ की हो आरज़ू हमारे पैगाम रखें हम कुछ रखें तो अपने मौत का सामान रखें इस झूठे जहां से बता अब क्या ताल्लुक़ात रखें जहाँ भी चले तो सिर्फ तेरी चाहत का गुमान रखें पोशाक हो या अदब इनसे मुझे अनजान रखें गर रखें तो अल्फ़ाज़ों से 'शरद' की पहचान रखें - अनिमेष चौबे 'शरद'     
तेरी खामोशी से आँसुओं का इंक़लाब बेहतर है, इंसाफ न दे सके तो हमें शर्मिंदगी का नकाब बेहतर है.!! ~अनिमेष चौबे 'शरद'
हमारा उनसे नज़रें उलझाना, शरमा के उनका पलकें झुकाना..! उनकी निगाहों का हमसे टकराना, सहम के हमारा नज़रें चुराना..!! यही सिलसिला है और यही बहाना, रोज दोहराते है यही अफ़साना..!!! ~ अनिमेष चौबे 'शरद'