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Showing posts from December, 2018
लोग चाहते हैं गर्मी बने रहे मौसम में, मशालों में निवालों में, अखबारों में दिलों में और चौराहों में और इसके लिए वे जला देंगे अंगीठी को, ईंधन को चूल्हे को, मकानों को इंसानों को या पूरे शहर को और तुम रहोगे महज़ एक लकड़ी का टुकड़ा जो बनाए रखोगे उनके लिए गर्मी इस ठंड में भी
ये दुनियां एक भोगी है और तुम एक लकड़ी जब भूख लगेगी इसे तुम इसके ईंधन होगे होगी जरूरत छत की तुम प्रमुख स्तंभ रहोगे जब थक कर चूर होगी शरीर तुम रहोगे साधन आराम के तुमसे डर दिखाया जाएगा तुम्हारे बल पर हिंसा होगी और जब ठंड से अकड़ेगा बदन तुम जला दिए जाओगे उष्मा के लिए तुममें होगी ऊर्जा तुममें होगी सृजात्मकता पर तुम रहोगे उपयोगी और दुनियां होगी उपभोगी इसलिए सजीवों की दुनियां में निर्जीव होना एक अभिशाप है
कभी आंख हमारी खुलती नहीं ख़्वाब तुम्हारे देखते देखते तो कभी नींद हमें आती नहीं, 'ख़्वाब' तुम्हारे देखते देखते ~ तुम्हारा अनिमेष