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Showing posts from May, 2021
 रात होना पर चांद का ना होना फूलों का होना, पर खुशबू का ना होना कुछ ऐसा ही है इस जहां का होना, पर जहां में तेरा ना होना ~ तुम्हारा अनिमेष
 मिल चुके हैं ख़ाक में... और वो बेखबर है कबसे अब निकल चुकी है ’जान’.. और ’जान’ खफा है कबसे.. ~ तुम्हारा अनिमेष
 जाने कौन सी बात आखिरी जाने कौन सी तकरार आखिरी थमते हुए इन सांसों की जाने कौन सी इकरार आखिरी ~ तुम्हारा अनिमेष
 गहरी सी आंखे थी आंखों में वादा था वादे में मुलाक़ात था मुलाक़ात में मेरे दोस्त आंखों के सिवा कुछ ना था ~ तुम्हारा अनिमेष
 इलाज़ न मिले, घुटते रहे चाहे दम सरकारी फ़रमान है की सब ठीक है शमशान बना हो चाहे शहर सारा सरकारी ऐलान है, की सब ठीक है ~ तुम्हारा अनिमेष
 कुछ बेवफाई से मारे गए,  कुछ रुसवाई से मारे गए ! हमारी बात अलग थी,  हम तो तन्हाई से मारे गए !! ~ तुम्हारा अनिमेष
 तुम उस क्षीतिज की तरह हो  जहां हर कोई डूब जाता है चाहे चांद हो या सूरज ~ तुम्हारा अनिमेष
 नयन नयन अश्रु अश्रु  अश्रु अश्रु नयन नयन द्वंद करता अब ये तन हलके प्राण भारी मन भीगा मन भीगे नयन अश्रु अश्रु नयन नयन ~ तुम्हारा अनिमेष