Posts

Showing posts from April, 2018

अल्फ़ाज़ों के जज़्बात 2

गुज़र गयी जो ज़िन्दगी अब उसकी तम्मना ज़िंदा है 'बचपन' बिछड़ गया, अब सिर्फ 'बचपना' ज़िंदा है साकी वो कोई हक़ीक़त ही होगी उनसा हसीं ख्वाब मैं बुन नही सकता..!! वो नादानियां वो मौसम न रहे बिछड़कर तुमसे हम 'हम' न रहे आँखों में उम्मीद लिए, चेहरे पर मुस्कान लिए हौसलों की कश्ती में, सपनो का जहान लिए कल एक सुबह होगी, लाखों शाम लिए कल लाखों ज़ुबां होंगी, सिर्फ तुम्हारा नाम लिए जिंदगी के अनसुलझे सवालों में खुश हूँ तुझे पाने से ज्यादा तेरे खयालों में खुश हूँ। ~ तुम्हारा अनिमेष बादल की परवाह तो देख जो मुझ पर गरजता है और तुझ पर बरसता है ~ तुम्हारा अनिमेष

अल्फ़ाज़ों के जज़्बात 2

गुज़र गयी जो ज़िन्दगी अब उसकी तम्मना ज़िंदा है 'बचपन' बिछड़ गया, अब सिर्फ 'बचपना' ज़िंदा है

लफ़्ज़ों के जज़्बात 1

माना कि तेरे दर पर इंसाफ की भी कीमत है, पर ऐसे बेपरवाही की कोई तो सज़ा होनी चाहिए..!! लफ़्ज़ों से बता न सके इशारों में जता न सके क्या क्या छिपा रखा है तुम्हें कभी दिखा न सके हज़ार तरीक़े थे मेरे क़त्ल करने के और कम्बख़त ने सादगी चुना...!! तमाम हुनर आते थे बच जाने के पर कम्बख़त ने सादगी चुना...!! मेरे दिल मे तुम्हे सिर्फ तुम्हारा ऐतबार मिलेगा गर देख लो नज़रों को तुम्हारा इंतज़ार मिलेगा बचपन ने मिट्टी नही चखी, जवानी ने धूप नही सेका, अब बुढ़ापे की दहलीज़ पर अस्पताल ही आसरा दिखा। सत्ता की चाहत में राजकुमार, संतरी हो गए, जिन्हें होना था निर्मोही वो आज के मंत्री हो गए हुक्मरानों के सियासी चालों में उलझ कर हम तुम जात - धरम के तंत्री हो गए