अल्फ़ाज़ों के जज़्बात 2

गुज़र गयी जो ज़िन्दगी अब उसकी तम्मना ज़िंदा है
'बचपन' बिछड़ गया, अब सिर्फ 'बचपना' ज़िंदा है


साकी वो कोई हक़ीक़त ही होगी
उनसा हसीं ख्वाब मैं बुन नही सकता..!!


वो नादानियां वो मौसम न रहे
बिछड़कर तुमसे हम 'हम' न रहे

आँखों में उम्मीद लिए, चेहरे पर मुस्कान लिए
हौसलों की कश्ती में, सपनो का जहान लिए

कल एक सुबह होगी, लाखों शाम लिए
कल लाखों ज़ुबां होंगी, सिर्फ तुम्हारा नाम लिए


जिंदगी के अनसुलझे सवालों में खुश हूँ
तुझे पाने से ज्यादा तेरे खयालों में खुश हूँ।

~ तुम्हारा अनिमेष

बादल की परवाह तो देख
जो मुझ पर गरजता है
और तुझ पर बरसता है

~ तुम्हारा अनिमेष


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