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Showing posts from November, 2019
जुल्फ़ों को तेरे यूं बेताब देखकर निकलते हैं हर रोज़ गुलाब लेकर ~ तुम्हारा अनिमेष
अंगने पे उसकी सजी रंगोली, हर रंग शहर को सजाता रहा... चौखट पे रखा दिया उसका, सारी रात रौशनी लुटाता रहा... ~ तुम्हारा अनिमेष