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Showing posts from July, 2018
ना आपने कभी पुछा, न हमने कभी बताने की गलती की फिर सारी उम्र हमनें यही गलती दोहराने की गलती की ~ तुम्हारा अनिमेष दिलों की रियासत के हम भी नवाब थे पर तुम्हारे बग़ैर इक मुफ़्लिसी सी रही ~ तुम्हारा अनिमेष खबर तुम्हारी पल पल की थी बेखबर तुम हर पल से थी..! ~ तुम्हारा अनिमेष बिन मतलब की बात है इतना शोर शराबा कैसा ज़रा सी बिगड़ी बात है इतना खून खराबा कैसा सारा शहर कल चांद के दीदार में था और हम सिर्फ तुम्हारे इंतजार में..!! ~ तुम्हारा अनिमेष इक पल की खुशी में सारी ज़िन्दगी बिता लेते सिर्फ तुम्हें देखकर हम भी अपनी ईद मना लेते ~ तुम्हारा अनिमेष ईद को चांद हर बार मिला हमें हमारा यार न इक बार मिला ~ तुम्हारा अनिमेष हर शख़्स गढ़ रहा है झूठ का पुलिंदा लगता है झूठ का कारोबार अच्छा है ~ अनिमेष सरिता चौबे बंज़र होती ज़मीन, सूखे पड़े खेतों की ज़बान हूँ कल रात जो भूख से मर गया मैं वही किसान हूँ खुदा को अफ़सोस होगा इंसान होने पर देख तुम्हें यूँ फरिश्तों पे मेहरबान होने पर ~ तुम्हारा अनिमेष