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Showing posts from January, 2018
जो कह दूँ न सुलझोगे तुम, जो लिख दूँ न समझोगे तुम..! एहसासों के इस जीवन में, शब्दों से केवल उलझोगे तुम..!! ~ अनिमेष
तुम्हारी कश्ती के मांझी बहुत हैं, हमें तो तैर के लहरों से टकराना है मेरी तन्हाई का आलम न पूछ साकी, जनाज़ा अपना भी हमें खुद ही सजाना है ~ अनिमेष