लफ़्ज़ों के जज़्बात 1

माना कि तेरे दर पर इंसाफ की भी कीमत है,
पर ऐसे बेपरवाही की कोई तो सज़ा होनी चाहिए..!!

लफ़्ज़ों से बता न सके
इशारों में जता न सके
क्या क्या छिपा रखा है
तुम्हें कभी दिखा न सके

हज़ार तरीक़े थे मेरे क़त्ल करने के
और कम्बख़त ने सादगी चुना...!!
तमाम हुनर आते थे बच जाने के
पर कम्बख़त ने सादगी चुना...!!

मेरे दिल मे तुम्हे सिर्फ
तुम्हारा ऐतबार मिलेगा
गर देख लो नज़रों को
तुम्हारा इंतज़ार मिलेगा

बचपन ने मिट्टी नही चखी, जवानी ने धूप नही सेका,
अब बुढ़ापे की दहलीज़ पर अस्पताल ही आसरा दिखा।

सत्ता की चाहत में राजकुमार, संतरी हो गए,
जिन्हें होना था निर्मोही वो आज के मंत्री हो गए
हुक्मरानों के सियासी चालों में उलझ कर
हम तुम जात - धरम के तंत्री हो गए











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