ये दुनियां एक भोगी है
और तुम एक लकड़ी

जब भूख लगेगी इसे
तुम इसके ईंधन होगे

होगी जरूरत छत की
तुम प्रमुख स्तंभ रहोगे

जब थक कर चूर होगी शरीर
तुम रहोगे साधन आराम के

तुमसे डर दिखाया जाएगा
तुम्हारे बल पर हिंसा होगी

और जब ठंड से अकड़ेगा बदन
तुम जला दिए जाओगे उष्मा के लिए

तुममें होगी ऊर्जा
तुममें होगी सृजात्मकता
पर तुम रहोगे उपयोगी
और दुनियां होगी उपभोगी

इसलिए सजीवों की दुनियां में
निर्जीव होना एक अभिशाप है

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