कैसे बतलाएं की इक नाम

से ही क्या - क्या होता है

कभी धड़कन बढ़ जाती है

कभी आंखों में चमक होता है


~ तुम्हारा अनिमेष

अब इतना भी ना बरस की सैलाब आ जाए

तू नज़र में रहे, और तेरा ही ख़्वाब आ जाए


~ तुम्हारा अनिमेष 


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