Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - April 19, 2021 मैं सूरज था, रौशनी काचांद के लिए ढल गयामैं पानी था नदी कापेड़ों के लिए रुक गयामैं पत्ता था पेड़ों काटहनियों के लिए सुख गयामैं टहनी था जंगल कासूरज के इंतज़ार में जल गया~ तुम्हारा अनिमेष Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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