चांद गुजरा क़रीब से और हमें खबर नहीं
सितारा टूटा क़रीब से और चांद को खबर नहीं
भंवरा उड़ा करीब से और फूलों को खबर नहीं
फूल गिरा मुरझाकर और शाखों को खबर नहीं
उठ गया शहर सारा और सूरज को खबर नहीं
सूरज डूबा शाम को और चिड़ियों को खबर नहीं
ये कैसा दौर है बेफ़िक्री का अब हमें खबर नहीं
Comments
Post a Comment