धीरे है ये दुनियां

तेज़ धड़कते दिल से


कोलाहल है यहां सबकुछ

सिवा तेरे होने के सुकून से


ठंडी है हर चीज़ जहां की

गर्म आसुओं की बूंदों से


सूखा है समंदर सारा

हाथो पे तेरे चुम्बन से


तबतक खूबसूरत है ये दुनियां

साथ बना रहे जबतक तुझसे


~ तुम्हारा अनिमेष

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