कुचल दिया थाली की रोटी

गर भूख कुचल देते, अच्छा होता


कुचल दिया सपनों को सारे

गर आँखें कुचल देते, अच्छा होता


कुचल दिया ये जिस्म जो तूने, 

खैर कोई बात नहीं

गर कुचल देते शिकवे सारे, अच्छा होता


चलते कुचलने हर दर्द दिलों की

गर हम तुम मिलते, अच्छा होता


~ तुम्हारा अनिमेष



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