रात के पृष्ट पर, चांद लिखते हुए
स्याही रुप से तेरे, मैं बनाता रहा
रात के पृष्ट पर चांद लिखते हुए
फूलों के जिस्म पर, खुशबू लिखते हुए
महक बदन से तेरे, मैं चुराता रहा
फूलों के जिस्म पर, खुशबू लिखते हुए
~ तुम्हारा अनिमेष
रात के पृष्ट पर, चांद लिखते हुए
स्याही रुप से तेरे, मैं बनाता रहा
रात के पृष्ट पर चांद लिखते हुए
फूलों के जिस्म पर, खुशबू लिखते हुए
महक बदन से तेरे, मैं चुराता रहा
फूलों के जिस्म पर, खुशबू लिखते हुए
~ तुम्हारा अनिमेष
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