दौर मुलाकातों का, हमें ऐसा मिला
जो भी मिला, किसी और का मिला

~ तुम्हारा अनिमेष

जुल्फ़ों को तेरे यूं बेताब देखकर
निकलते हैं हर रोज़ गुलाब लेकर

~ तुम्हारा अनिमेष


Comments