दौर मुलाकातों का, हमें ऐसा मिला
जो भी मिला, किसी और का मिला
~ तुम्हारा अनिमेष
जुल्फ़ों को तेरे यूं बेताब देखकर
निकलते हैं हर रोज़ गुलाब लेकर
~ तुम्हारा अनिमेष
जो भी मिला, किसी और का मिला
~ तुम्हारा अनिमेष
जुल्फ़ों को तेरे यूं बेताब देखकर
निकलते हैं हर रोज़ गुलाब लेकर
~ तुम्हारा अनिमेष
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