इन कोलाहलों को इतनी भी हवा न दो दोस्त
कि शोर में तुम्हें अपनी 'चीख' भी ना सुनाई दे

~ तुम्हारा अनिमेष



इंतज़ार है मुझे तुम्हारा उसूलों पे अड़ जाने का
सिर्फ़ पलकों को नहीं, नज़रों को भी उठाने का

~ तुम्हारा अनिमेष


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