स्याह रात में दिया जलाकर क्या कीजिएगा
अंधे शहर को रौशनी दिखाकर क्या कीजिएगा
तमाशबीन है ये जहां, गर बात ये मान भी लें
खुद का ही तमाशा बनाकर क्या कीजिएगा
जिस दौर में अपनों का लहजा हो परायों सा
उस दौर में सबको अपना बनाके क्या कीजिएगा
जिन शहरों के दिलों में भरी हो नफरतें
उन शहरों में मोहब्बत लुटाकर क्या कीजिएगा
~ तुम्हारा अनिमेष
अंधे शहर को रौशनी दिखाकर क्या कीजिएगा
तमाशबीन है ये जहां, गर बात ये मान भी लें
खुद का ही तमाशा बनाकर क्या कीजिएगा
जिस दौर में अपनों का लहजा हो परायों सा
उस दौर में सबको अपना बनाके क्या कीजिएगा
जिन शहरों के दिलों में भरी हो नफरतें
उन शहरों में मोहब्बत लुटाकर क्या कीजिएगा
~ तुम्हारा अनिमेष
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