थक जाओगे तुम एक दिन हमसे किनारा करते करते
आयेगी हमारी महक तुमसे यूं हीं किनारा करते करते
जी रहें हैं गमों के जहां में हंसी को गवारा करते करते
महफिलों की शब में आंसूओं को सितारा करते करते
मिला कुछ भी नहीं हमें हर वक़्त तुम्हारा करते करते
अब खो दिया है खुदको, सबकुछ तुम्हारा करते करते
जिसे पाया गैरों में, वो ढूंढ रहा है सहारा करते करते
खोया था जिसे अपनों में, हमनें बेसहारा करते करते
आयेगी हमारी महक तुमसे यूं हीं किनारा करते करते
जी रहें हैं गमों के जहां में हंसी को गवारा करते करते
महफिलों की शब में आंसूओं को सितारा करते करते
मिला कुछ भी नहीं हमें हर वक़्त तुम्हारा करते करते
अब खो दिया है खुदको, सबकुछ तुम्हारा करते करते
जिसे पाया गैरों में, वो ढूंढ रहा है सहारा करते करते
खोया था जिसे अपनों में, हमनें बेसहारा करते करते
~ तुम्हारा अनिमेष
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