आशिक़ हुए हैं रौशन बहुत महताब की तरह
हम तो रौशनी लुटाते रहे, आफ़ताब की तरह

~ तुम्हारा अनिमेष

उजियारी प्रातः बेला सी राधा रानी
श्यामल सांझ कन्हैया मेरे कृपलानी

~ तुम्हारा अनिमेष




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