कोई तो सीखिये उनसे बातें बनाना,
बातों ही बातों से दिलों को बहलाना


चमकते रहे उम्र भर और कभी सितारे नहीं हुए
गैरों कि क्या कहें हम खुद कभी हमारे नहीं हुए


चाय अब भी जीभ जलाया करती है
और तुम अब भी दिल...!


जब बातें करती, हो मधुर कोलाहल चिड़ियों सी
चमकती आखें कहती कहानी फुलझड़ीयों सी


तिमिर से जो हो लड़ रहा मैं वो चिराग हूँ
होगी सहर इस रात की इक यही आस हूँ

महफिलें सजाना, तहजीब के नगमें सुनाना
याद आता है हमें उनका बातों के गुब्बारे उड़ाना



चाहत नहीं मोहब्बत भरी मुलाकात होती रहे
आरज़ू है किश्तों में ही सही पर बात होती रहे



मुश्किल है बहुत उनको दिल कि बात बताना
ज़िन्दगी को हो ज़िन्दगी के जज़्बात समझाना


Comments