बचपन की वो गुमशुदा हलचल ढूँढता हूँ
रंज-ओ-ग़म में अब तेरा आँचल ढूँढता हूँ

मैं तुझे ढूंढता हूँ वो मौसम रूहानी ढूँढता हूँ
सावन तो कभी तेरी कही कहानी ढूँढता हूँ

तुझे क्या ख़बर की हर शय में तुझे ढूँढता हूँ
अपनी की गलतियों की अब सजा ढूँढता हूँ



~ तुम्हारा अनिमेष

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