मुलाक़ात थी उनसे मिलने की ख़ातिर
नींद, चैन, अक्स अब उनमें ही गुम है
~ तुम्हारा अनिमेष
कुरेदा जो ज़ख्म को अश्क़ ही मरहम निकला
तुमसे ज़्यादा तुम्हारा गम मेरा हमदम निकला
~ तुम्हारा अनिमेष
नींव से लेकर गुबंद तक, सब उनकी नक्काशी है
देह दमकता वृंदावन सा कर्म ही मथुरा- काशी है
चट्टान तोड़ती बाहें हो या मंज़िल को जाती राहें
मेहनतकश मजदूरों का सारा जग अभिलाषी है
~ अनिमेष सरिता चौबे
तुम्हारी महफिलों से दूर बहुत हूँ
अपनी दुनिया में मशहूर बहुत हूँ
वास्ता नही है मतलबी रिवाज़ों से
अपने उसूलों में मगरूर बहुत हूँ
~ तुम्हारा अनिमेष
हर घड़ी बिखर रहा हूँ
हर पल निखर रहा हूँ
~ तुम्हारा अनिमेष
दिलों की रियासत के हम भी नवाब थे
पर तुम्हारे बग़ैर इक मुफ़्लिसी सी रही
~ तुम्हारा अनिमेष
नींद, चैन, अक्स अब उनमें ही गुम है
~ तुम्हारा अनिमेष
कुरेदा जो ज़ख्म को अश्क़ ही मरहम निकला
तुमसे ज़्यादा तुम्हारा गम मेरा हमदम निकला
~ तुम्हारा अनिमेष
नींव से लेकर गुबंद तक, सब उनकी नक्काशी है
देह दमकता वृंदावन सा कर्म ही मथुरा- काशी है
चट्टान तोड़ती बाहें हो या मंज़िल को जाती राहें
मेहनतकश मजदूरों का सारा जग अभिलाषी है
~ अनिमेष सरिता चौबे
तुम्हारी महफिलों से दूर बहुत हूँ
अपनी दुनिया में मशहूर बहुत हूँ
वास्ता नही है मतलबी रिवाज़ों से
अपने उसूलों में मगरूर बहुत हूँ
~ तुम्हारा अनिमेष
हर घड़ी बिखर रहा हूँ
हर पल निखर रहा हूँ
~ तुम्हारा अनिमेष
दिलों की रियासत के हम भी नवाब थे
पर तुम्हारे बग़ैर इक मुफ़्लिसी सी रही
~ तुम्हारा अनिमेष
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