अनूठी नजाकतें है उन नजरों में
इस नजर को समझाए कौन
हवाएँ रूख मोड़ लेती हैं
उनकी जुल्फों को देखकर
इन उंगलियो बतलाए कौन
मैखाने सुने हो गए हैं
उनकी कशिश से
इन होठो को भिगाए कौन
आफताब भी शर्माने लगे हैं
उसकी रौशनी को देखकर
इस जुगनू को चमकाए कौन
सारे शहर का कत्ल होते
आज उस मासूम को दिखलाए कौन
इस नजर को समझाए कौन
हवाएँ रूख मोड़ लेती हैं
उनकी जुल्फों को देखकर
इन उंगलियो बतलाए कौन
मैखाने सुने हो गए हैं
उनकी कशिश से
इन होठो को भिगाए कौन
आफताब भी शर्माने लगे हैं
उसकी रौशनी को देखकर
इस जुगनू को चमकाए कौन
सारे शहर का कत्ल होते
आज उस मासूम को दिखलाए कौन
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