सत्य को करते प्रकाशित छंद हो जाएं,
स्वयं को करते संघर्षित द्वंद हो जाएं..!
ओजस्विता के अनिमेष बनकर,
हर मस्तक आज विवेकानंद हो जाएं..!!

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