न दिल बहलाया जाता है, न आहें भरी जाती है,
आजकल उन्हीं के ख़यालों में ज़िंदगी जी जाती है।

कभी उनको पुकारते हैं कभी खुद को तलाशते हैं,
सवेरा गुनगुनाते हुए शामें मुस्कुराते हुए गुजारते हैं।

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