ज़िन्दगी के हर मोड़ पर आज़माया गया,
पर उसके इंतज़ार से कठिन कुछ भी न था।
उनके हर अल्फ़ाज़ को खुदा जाना हमने,
और उन्हें हम पर यकीं कुछ भी न था।
इन निगाहों की सोहबत में थे गुलशन,
पर उनकी यादों सा हसीं कुछ भी न था।
कुदरत ने तराशा था उसे इस कदर,
इस जहाँ में उनसा कहीं कुछ भी न था।
मेरे अक्स ने तलाशा मुझे हर शहर,
मुझमें बचा मैं, अब कुछ भी न था..!
~ अनिमेष चौबे 'शरद'
पर उसके इंतज़ार से कठिन कुछ भी न था।
उनके हर अल्फ़ाज़ को खुदा जाना हमने,
और उन्हें हम पर यकीं कुछ भी न था।
इन निगाहों की सोहबत में थे गुलशन,
पर उनकी यादों सा हसीं कुछ भी न था।
कुदरत ने तराशा था उसे इस कदर,
इस जहाँ में उनसा कहीं कुछ भी न था।
मेरे अक्स ने तलाशा मुझे हर शहर,
मुझमें बचा मैं, अब कुछ भी न था..!
~ अनिमेष चौबे 'शरद'
Comments
Post a Comment