वो हँसती है वो मुस्कुराती है,
कभी- कभी वो इठलाती है,

अपनी बेताबियाँ वो मुझे बतलाती है,
क्या है पढ़ना वो मुझे सिखलाती है,

दिनभर के किस्से सुनाकर,
रातभर वो मेरे हिस्से मे आती है,

मेरी गुस्ताखियो से रूठकर,
वो नादान सी शक्लें बनाती है,

अगली मुलाकात का इंतजार देकर,
वो हर बार मुझे सताती है......!!

फिर अगले रोज़ वो मुझसे मिलने,
ख्वाबों मे आकर ख्यालों मे इठलाती है..!!
    

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