किसके छुअन का असर है, फूलों में ये अजब सी ख़ुशबू कैसी,
कौन गुजरा है यूँ कस्तूरी लिए, इन बागों में ये बहार कैसी।
कभी सितारे टूटते हैं कभी चाँद छुप जाते हैं,
आसमान में जुगनुओं की ये आफताब कैसी।
निगाहों में तेरी तस्वीर सजाकर हमारा अंदाज ही अलग है,
न जाने तू जिनके पास होगी उनकी हालत कैसी।
इश्क़ करने की गुस्ताखी की है बस इजहार से चुके हैं हम,
जो न रखते लिहाज तुम्हारा, ये शबाब कैसा ये जुस्तजू कैसी।
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