तुम से गद्य मेरा तुमसे पद्य, तुमसे ही व्याकरण,
मेरे साहित्यिक संसार की तुम अप्रतिम अलंकरण।
सौम्य सी काव्यधारा करूँ मैं तुमको अर्पण,
रचनाओं कि आकाशगंगा का ये सलिल कण।
मेरे साहित्यिक संसार की तुम अप्रतिम अलंकरण।
सौम्य सी काव्यधारा करूँ मैं तुमको अर्पण,
रचनाओं कि आकाशगंगा का ये सलिल कण।
Comments
Post a Comment