मदहोश होने को दो लफ्ज़ ही काफी थे,
सारी रात गुफ्तगू के बाद क्या हाल है,
तुम्हें क्या बतलाएँ।
यूँ तो परस्तार हैं हम तेरी ज़ुल्फ़ो के,
उसके आगोश के बाद क्या हाल है,
तुम्हें क्या बतलाएँ।
इक बार नजाकत से देखा है तुमने,
इस दिल का तब से क्या हाल है,
तुम्हें क्या बतलाएँ।
अनिमेष चौबे 'शरद'
सारी रात गुफ्तगू के बाद क्या हाल है,
तुम्हें क्या बतलाएँ।
यूँ तो परस्तार हैं हम तेरी ज़ुल्फ़ो के,
उसके आगोश के बाद क्या हाल है,
तुम्हें क्या बतलाएँ।
इक बार नजाकत से देखा है तुमने,
इस दिल का तब से क्या हाल है,
तुम्हें क्या बतलाएँ।
अनिमेष चौबे 'शरद'
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