हर झरने की कल-कल में
झंकार तुम्हारी है

सुहावने इस दृश्य में
तस्वीर तुम्हारी है

सच हो तुम या हो
कोई स्वप्न मधुर

खुद से निरंतर
यह सवाल जारी है

अनिमेष चौबे 'शरद'

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